कुण्डलिनी शक्ति :- हमारे शरीर में मेरुदंड (SPINAL CHORD) के निचले सिरे पर एक शक्तिशाली नाड़ी है , जो की साढ़े तीन फेरे लिए हुए अपने पूँछ को अपने मुख में रखकर सुप्तावस्था में रहती है |
इसके साढ़े तीन बार कुंडलित होने के कारण ही इसका नाम कुंडलिनी शक्ति पड़ा | इसे अंग्रेजी में SERPENT POWER कहते है |
इसे योगीजन एक सर्प से भी परिभाषित करते है |
जो भी हो लेकिन ये कुंडलिनी बड़ी ही शक्तिशाली है | यह शक्ति का भंडार है | सामान्य मनुष्य के द्वारा इसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता |
इसके साढ़े तीन बार कुंडलित होने के कारण ही इसका नाम कुंडलिनी शक्ति पड़ा | इसे अंग्रेजी में SERPENT POWER कहते है |
इसे योगीजन एक सर्प से भी परिभाषित करते है |
जो भी हो लेकिन ये कुंडलिनी बड़ी ही शक्तिशाली है | यह शक्ति का भंडार है | सामान्य मनुष्य के द्वारा इसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता |
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें